महाराष्ट्र के अकोला जिले में लंबे इंतजार के बाद मॉनसून की पहली अच्छी बारिश हुई है, जिससे सूखे खेतों में रौनक लौट आई है. बारिश के बाद खरीफ फसलों की बुवाई तेजी से शुरू हो गई है. इस साल जिले में लगभग 5.41 लाख हेक्टेयर में फसलों की खेती का लक्ष्य है, जिसमें सोयाबीन और कपास प्रमुख हैं.
कृषि मंत्रालय ने मई 2020 के अपने नोटिफिकेशन में माना था कि 'कार्बेंडाजिम' सेहत के लिए एक गंभीर खतरा है. इसके बावजूद इसे पूरी तरह से बैन नहीं किया गया है.
El-Nino Effect on Monsoon Rain: केरल में इस साल मॉनसून की बारिश में 33 प्रतिशत की कमी आई है. खासकर वायनाड जिले में 64 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. कम बारिश से खेती प्रभावित हो रही है और किसानों की चिंता बढ़ रही है. मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, अल-नीनो के असर से बारिश में कमी का खतरा बना हुआ है, जिससे भूजल स्तर घटने और पेयजल संकट की संभावना है.
पालक (Spinach) की खेती कम समय में तैयार होकर अच्छा मुनाफा देने वाली फसल है. सही तरीके से इसकी खेती की जाए तो 25 से 40 दिनों के भीतर पहली कटाई मिल सकती है, जिससे जल्दी कमाई शुरू हो जाती है.
कार्बोफ्यूरान अमेरिका और यूरोप में बैन है लेकिन भारत में अभी भी फसल सुरक्षा के नाम पर इसका इस्तेमाल होता है. यह कीटनाशक मधुमक्खियों और पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक है. सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, यह अत्यधिक विषैला है और हार्मोनल सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है. लेकिन फिर भी कमजोर कानून और एग्रो-केमिकल कंपनियों के दबाव के कारण भारत के बाजारों में बिक रहा है.
भीषण गर्मी में सिर्फ पौधे ही नहीं, बल्कि मिट्टी भी तेजी से गर्म होकर पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है. जब मिट्टी का तापमान बढ़ जाता है तो पानी तेजी से वाष्पित होता है और पौधे तनाव में आ जाते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार कुछ आसान तरीकों से मिट्टी का तापमान कम रखा जा सकता है, जिससे पौधे ज्यादा समय तक हरे-भरे और स्वस्थ रहते हैं.
मच्छरों की समस्या बारिश और गर्मियों में तेजी से बढ़ जाती है, जिससे घर और बाहर बैठना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में केमिकल स्प्रे पर निर्भर रहने के बजाय प्राकृतिक उपाय ज्यादा सुरक्षित और असरदार माने जाते हैं. कुछ खास पौधे अपनी तेज खुशबू और प्राकृतिक तेलों के कारण मच्छरों को दूर रखने में मदद कर सकते हैं.
Markets flooded with jamun supply: सोशल मीडिया पर कई पोस्ट्स शेयर की जा रही हैं, जिसमें लोग एक पुरानी कहावत को याद करते हुए कह रहे हैं कि अगर गर्मियों में जामुन के पेड़ पर ज्यादा फल आ जाएं तो उस साल सूखे की संभावना बढ़ जाती है. क्या यह सिर्फ कहावत है या इसमें विज्ञान भी कुछ कहता है? आइए जानते हैं.
El-Nino effect on Agriculture: इस साल भारत में अल नीनो के प्रभाव से मॉनसून की बारिश कमजोर रहने की संभावना है, जिससे खरीफ फसलों पर सूखे का खतरा बढ़ गया है. खासकर धान, गन्ना, कपास जैसी फसलों को भारी नुकसान हो सकता है. पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने किसानों को सूखा सहन करने वाली फसलें बोने और फसल बीमा योजना का लाभ लेने की सलाह दी है.
गर्मियों में जब ज्यादातर पौधे फूल देना बंद कर देते हैं, तब ये खास झाड़ियां तेज धूप और कम पानी में भी लगातार खिलकर आपके गार्डन को रंगों और खुशबू से भर देती हैं.
लाल चींटियां सिर्फ दर्दनाक डंक ही नहीं मारतीं, बल्कि आपके लॉन, पौधों और बगीचे को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं. अच्छी बात यह है कि इनके नियंत्रण के लिए हमेशा केमिकल्स का सहारा लेने की जरूरत नहीं होती. कुछ प्राकृतिक उपाय अपनाकर भी इनकी संख्या कम की जा सकती है.
अल-नीनो, कम बारिश और इथेनॉल की बढ़ती मांग भारत के चीनी सेक्टर के लिए नई चुनौती बन सकती है. आने वाले कुछ सालों तक देश में चीनी का अतिरिक्त स्टॉक कम रह सकता है.
मनीप्लांट को घर में सुख-समृद्धि और हरियाली का प्रतीक माना जाता है, लेकिन अगर आपके घर में बिल्ली है तो यह पौधा परेशानी का कारण बन सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार मनीप्लांट (पाथोस) की पत्तियों और तनों में ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो बिल्लियों के लिए विषैले होते हैं और उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
पेड़ों पर फल लगते ही गिलहरियों की नजर उन पर पड़ जाती है. ये छोटे जीव पके और कच्चे दोनों तरह के फलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे मेहनत से तैयार की गई फसल खराब हो जाती है. अगर आपके बगीचे में भी यह समस्या है, तो कुछ आसान उपाय अपनाकर आप फलों को सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर पैदावार पा सकते हैं.
वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी विमानों ने जंगलों और खेतों को नष्ट करने के लिए 'एजेंट ऑरेंज' नामक रसायन का छिड़काव किया था. आज आधी सदी बाद भी उसी खतरनाक रसायन का मुख्य हिस्सा 2,4-डी और दुनिया भर में प्रतिबंधित कई घातक कीटनाशक भारत के खेतों में धड़ल्ले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं.
महाराष्ट्र में मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ने से खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई है. राज्य कृषि विभाग के अनुसार जून के मध्य तक केवल 1 प्रतिशत बुवाई ही हो सकी है.
डाइमेथोएट कीटनाशक को लेकर भारत में एक बार फिर बहस तेज हो गई है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस रसायन पर दुनिया के कई देशों में प्रतिबंध है, जबकि भारत में इसका उत्पादन और बिक्री कुछ शर्तों के साथ जारी है.
PM Kisan Yojana 23rd Installment: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त 20 जून को जारी की जाएगी. रजिस्टर्ड किसान आधिकारिक वेबसाइट pmkisan.gov.in पर जाकर बेनिफिशियरी लिस्ट में अपना स्टेटस चेक कर सकते हैं कि कहीं आपका नाम कट तो नहीं गया.
अगर आप घर पर गार्डनिंग शुरू करना चाहते हैं, तो फलों के बीजों को पानी में अंकुरित करना एक आसान और मजेदार तरीका हो सकता है. सही देखभाल के साथ कुछ बीज सिर्फ 1 से 2 हफ्तों में अंकुरित हो जाते हैं, जबकि कुछ को अधिक समय लग सकता है.
नरसिंहपुर जिले के छेना कछार गांव में किसान विजय पाल सिंह पटेल ने विदेशी तकनीक से आम की बागवानी कर सफलता की मिसाल पेश की है. 70 एकड़ में फैले इस बाग में केसर और जम्बो केसर आम उगाए जा रहे हैं. इजरायली अल्ट्रा हाई डेंसिटी तकनीक से तैयार इन आमों का निर्यात दुबई और लंदन तक किया जा चुका है.
पंजाब के पठानकोट में इस बार लीची की बंपर फसल हुई है. अनुकूल मौसम और किसानों की मेहनत के चलते अब पठानकोट की मशहूर लीची देश के साथ-साथ विदेशों में भी पहुंचेगी. लंदन, दुबई और सिंगापुर में पहली बार बड़े स्तर पर लीची भेजने की तैयारी की जा रही है. बागवानी विभाग और बागवानों को इससे बेहतर बाजार मिलने की उम्मीद है.