राम मंदिर (Ram Mandir) का निर्माण उत्तर प्रदेश के अयोध्या (Ayodhya, Uttar Pradesh) में हो रहा है. जहां इस मंदिर का निर्माण हो रहा है, हिंदू आस्थावान उसे भगवान राम की जन्मभूमि (Ram Janmabhoomi) मानते हैं. मंदिर का निर्माण श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra) द्वारा करवाया जा रहा है. राम मंदिर के लिए भूमि पूजन अगस्त 2020 में हुआ था. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) भी शामिल हुए थे.
अयोध्या के फैजाबाद बार एसोसिएशन ने राम मंदिर के दान में कथित हेराफेरी मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों का केस न लड़ने का फैसला किया है. एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि जो वकील आरोपियों की पैरवी करेगा, उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. बैठक में मंदिर प्रबंधन से जुड़े चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव से तीन दिन में अयोध्या छोड़ने की मांग भी की गई.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसियों ने 70 से 80 लोगों को नोटिस जारी कर पूछताछ शुरू कर दी है. आरोपियों के मोबाइल फोन से डिलीट चैट्स को फॉरेंसिक लैब भेजा जाएगा.
राम मंदिर के चढ़ावे में गबन को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आमने-सामने हैं. अखिलेश ने कंट्रोल रूम की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए तो सीएम योगी आदित्यनाथ ने समाजवादियों के राज में रामभक्तों के साथ हुए सलूक को लेकर सीधा वार किया.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर सियासत के बीच सीएम योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव को कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन का खुलकर समर्थन करने की चुनौती दी है. सीएम योगी ने कहा कि अखिलेश यादव खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाली कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय का बयान भी दर्ज किया है. इस मामले में अनिल मिश्रा से भी पूछताछ हो सकती है. चंपत राय ने अभी हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया है. हालांकि उनके इस्तीफे पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. छापेमारी के दौरान अविनाश शुक्ला को हिरासत में लिया गया है. उसके पास से नकदी भी बरामद की गई है.
उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों राम मंदिर के चंदा चोरी के मुद्दे पर सपा ने आक्रामक तेवर अपना रखा है, जिसे काउंटर करने के लिए योगी आदित्यनाथ ने भी बड़ा दांव चल दिया है. सीएम योगी ने एक तरफ मथुरा का मुद्दा उठाकर प्रहार किया तो दूसरी तरफ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने राम मनोहर लोहिया के परिजनों से मुलाकात की.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय का बयान दर्ज किया है. चढ़ावा चोरी केस में जांच जारी है.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है. पुलिस ने जांच के तहत ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान दर्ज किया है. सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट को कथित गड़बड़ी की जानकारी पहले से थी. मामले में सीसीटीवी फुटेज, नकदी बरामदगी और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है. अब तक इस मामले में आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है.
राम जन्मभूमि ट्रस्ट पर मंदिर में चढ़ावा में हेरफेर करने के आरोप लगे हैं. इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कहा है कि सीबीआई की अगुवाई में एक टीम बनाकर समय सीमा के भीतर जांच कराई जाए और यह जांच कोर्ट की निगरानी में हो. याचिकाकर्ता ने इस मामले को तुरंत सुनने की अपील की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में नया CCTV फुटेज सामने आया है, जिसमें आरोपी अविनाश शुक्ला पुलिस के साथ सफेद कार की ओर जाता और हाथ में काला बैग लिए दिख रहा है. सूत्रों के अनुसार उसके पास से पांच लाख रुपये बरामद हुए थे. दूसरी ओर पुलिस ने सभी सात आरोपियों के घरों पर छापेमारी कर जेवरात और प्रॉपर्टी दस्तावेज जब्त किए हैं, जिनका अब सत्यापन कराया जाएगा.
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. फैजाबाद बार एसोसिएशन के वकीलों ने संकेत दिए हैं कि वे आरोपियों की पैरवी नहीं करेंगे. बार एसोसिएशन की सोमवार को होने वाली आमसभा में इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.
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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडे ने दावा किया है कि इस पूरे मामले की जानकारी सबसे पहले अखिलेश यादव को मिली थी. उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर ट्रस्ट के भीतर ही कर्मचारियों के बीच चोरी किए गए चढ़ावे के बंटवारे को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद मामला बाहर आया.
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में अब नए खुलासे सामने आए हैं. सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट को गड़बड़ी की जानकारी पहले से थी और पुलिस ने औपचारिक एफआईआर से पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी थी. 5 जून को आरोपी अविनाश शुक्ला को हिरासत में लेकर उसके पास से नकदी बरामद की गई थी.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में नया खुलासा सामने आया है, जिसमें पांच जून की रात का सीसीटीवी वीडियो चर्चा में है. फुटेज में आरोपी को पुलिस के साथ ले जाते और उसके पास बैग दिखाई देता है. शुरुआती कार्रवाई पहले ही हो चुकी थी, लेकिन मामला बाद में सार्वजनिक हुआ, जिससे कई सवाल उठ रहे हैं.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के बीच बयानबाजी का सिलसिला जारी है. योगी ने श्री कृष्ण जन्मभूमि को लेकर अखिलेश को चुनौती दी और उनके एजेंडे पर सवाल उठाए. वहीं, अखिलेश ने सनातन धर्म की रक्षा की बात करते हुए बीजेपी सरकार पर कई आरोप लगाए.
राम मंदिर के कथित दान विवाद को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उसके लिए राष्ट्र नहीं, बल्कि दान पहले है और मुख्यमंत्री पर भी सवाल उठाए. इसके जवाब में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर राम भक्तों पर गोली चलवाने का आरोप लगाया.
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच तेज करते हुए पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है. जांच एजेंसियां मामले से जुड़े लोगों के घरों और अन्य संभावित स्थानों पर तलाशी लेकर दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाने में लगी हैं. पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान मिले सुरागों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है और मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, पूरे प्रकरण की गहन जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी.
अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में पुलिस को बड़ा सुराग मिला है. आठ आरोपियों में से पांच एक-दूसरे के बहुत करीब रहते हैं या रिश्तेदार हैं. इनके घर सिर्फ 100 से 200 मीटर की दूरी पर हैं. लव कुश मिश्रा के घर के पीछे ही अविनाश शुक्ला का घर है, जबकि अनुकल्प मिश्रा का घर करीब 200 मीटर दूर है, जो उन्होंने दो साल पहले खरीदा था.
राम मंदिर चंदा चोरी मामले में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का रिश्तेदार मनीष यादव कई बार चोरी करते हुए सीसीटीवी में कैद हुआ था. इसके बावजूद उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर ने मनीष को नौकरी दिलवाई थी. कुल मिलाकर 7 आरोपियों से लगभग 80 लाख रुपये की बरामदगी हुई है.
राजनीति में राम मंदिर 2027 के चुनावों में प्रमुख मुद्दा बनने जा रहा है. अखिलेश यादव ने साफ कहा है कि यदि उनकी सरकार 2027 में बनती है तो अयोध्या को बेहतरीन और शानदार तरीके से विकसित किया जाएगा. यह घोषणा उनके चुनावी एजेंडा का एक अहम हिस्सा बन गई है. अयोध्या के विकास को लेकर जनता में उम्मीदें बढ़ी हैं और इस विषय पर कई राजनीतिक चर्चा भी हो रही हैं.